-: संवाददाता एक आयना भारत
सिवाना :- न स्कूल की मस्ती ना कोचिंग, ना दोस्तों से मिलना, ना ही बाहर जाकर खेलना, घरों में हैं मम्मी पापा तो पढ़ाई के संग घर ही है मस्ती का ठिकाना लॉकडाउन के चलते बच्चे स्ट्रीट फूड, रोडसाइड मंचिंग और बर्गर पिज़्ज़ा से दूर हैं और घर पर ही रह रहे हैं। ऐसे में बच्चे घर में उदास ना हो इसके लिए अभिभावकों ने अपनी कमर को कस लिया है वह बच्चों संग खुद बच्चा बन उनको नए-नए रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रख रहे हैं तो वहीं उनके पसंदीदा पकवानों को घर पर ही तैयार कर उनके संग लुत्फ उठा रहे हैं। इन दिनों घर में बच्चों को रोकना एक मुश्किल काम है। बाजार, विधालय कोचिंग सेंटर बंद होने से बच्चे कहीं जा नहीं पा रहे हैं जिस कारण न पढाई कर पा रहे हैं और ना ही आउटडोर गेम्स खेल पा रहे हैं ऐसे में उन को रिझाने के लिए हम लोग को आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है।
इनका कहना है :-
बेटे के संग खुद बनी दोस्त
"मेरे 11 साल का बेटा हैं,लॉकडाउन की वजह से उसको मैं ना तो घर से बाहर निकलने दे रही हूं ना ही उसके दोस्तों को घर में आने दे रही हूं। ऐसे में इस वक्त मुझे ही उसकी दोस्त बनकर उसके साथ खेलना पड़ रहा है और एक शिक्षिका के जैसे उसको पढ़ाना भी पड़ रहा है। अपना पूरा दिन नए नए गेम्स खेलने डांस सिंगिंग और एक्सरसाइज करने में बिताती हूँ!"
तारा प्रजापति
सिवाना निवासी
"अपने घरों पर सुरक्षित रहकर परिवार व बच्चों के साथ कुछ रचनात्मक कार्य करें जिससे मनोरंजन के साथ वह नई चीजें भी सीखें।"
वेलाराम प्रजापत
अध्यापक खबर by एक आयना भारत
सिवाना :- न स्कूल की मस्ती ना कोचिंग, ना दोस्तों से मिलना, ना ही बाहर जाकर खेलना, घरों में हैं मम्मी पापा तो पढ़ाई के संग घर ही है मस्ती का ठिकाना लॉकडाउन के चलते बच्चे स्ट्रीट फूड, रोडसाइड मंचिंग और बर्गर पिज़्ज़ा से दूर हैं और घर पर ही रह रहे हैं। ऐसे में बच्चे घर में उदास ना हो इसके लिए अभिभावकों ने अपनी कमर को कस लिया है वह बच्चों संग खुद बच्चा बन उनको नए-नए रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रख रहे हैं तो वहीं उनके पसंदीदा पकवानों को घर पर ही तैयार कर उनके संग लुत्फ उठा रहे हैं। इन दिनों घर में बच्चों को रोकना एक मुश्किल काम है। बाजार, विधालय कोचिंग सेंटर बंद होने से बच्चे कहीं जा नहीं पा रहे हैं जिस कारण न पढाई कर पा रहे हैं और ना ही आउटडोर गेम्स खेल पा रहे हैं ऐसे में उन को रिझाने के लिए हम लोग को आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है।
इनका कहना है :-
बेटे के संग खुद बनी दोस्त
"मेरे 11 साल का बेटा हैं,लॉकडाउन की वजह से उसको मैं ना तो घर से बाहर निकलने दे रही हूं ना ही उसके दोस्तों को घर में आने दे रही हूं। ऐसे में इस वक्त मुझे ही उसकी दोस्त बनकर उसके साथ खेलना पड़ रहा है और एक शिक्षिका के जैसे उसको पढ़ाना भी पड़ रहा है। अपना पूरा दिन नए नए गेम्स खेलने डांस सिंगिंग और एक्सरसाइज करने में बिताती हूँ!"
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"अपने घरों पर सुरक्षित रहकर परिवार व बच्चों के साथ कुछ रचनात्मक कार्य करें जिससे मनोरंजन के साथ वह नई चीजें भी सीखें।"
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