जोधपुर ग्रामीण
मरुधर आईना
(मदनसिंह के राजपुरोहित)
मथानिया निकटवर्ती ग्राम भैंसेर चावंडियाली से करीब 300 कार्यकर्ताओं ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए ब्रह्मधाम आसोतरा पहुँचकर सेवा कार्यों में सक्रिय योगदान दिया। कार्यकर्ताओं ने श्रीब्रह्मजी मंदिर तीर्थ परिक्षेत्र, श्रीखेतेश्वर बैंकुठधाम,गौशाला व भोजनशाला में श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया।इस बार विशेष रूप से 100 महिलाओं व बालिकाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही राजपुरोहित समाज विकास सेवा समिति, भैंसेर चावंडियाली के अध्यक्ष भगवानसिंह चावंडिया व समाजसेवी अखेसिंह राजपुरोहित ने बताया कि वरिष्ठ कार्यकर्ता मांगीलालसिंह व हरिसिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में दल ने गुरुवार को आसोतरा पहुँचकर दर्शन के साथ सेवा गतिविधियों में हिस्सा लिया। कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से साफ-सफाई कर सामाजिक एकता का परिचय दिया।शुक्रवार को वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर सभी कार्यकर्ताओं ने प्रातःदर्शन कर गादीपति सद्गुरुदेव संत तुलसारामजी महाराज व वेदान्ताचार्य डॉ.ध्यानारामज महाराज से आशीर्वाद लिया।इसके बाद शिवधुणा पर गोटा होम,प्रसादी वितरण,भोजनशाला में सेवा, जलसेवा व पार्किंग व्यवस्था संभालते हुए आयोजन को सफल बनाया।वरिष्ठ कार्यकर्ता मदनसिंह व विशनसिंह ने बताया कि इस बार पुरुषों के साथ महिलाओं व बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने महिला भोजनशाला में सेवाएं देकर नई मिसाल पेश की।
इस अवसर पर प्रेमसिंह नेताजी, भीमसिंह सायला,पुखराजसिंह, तेजसिंह,भागीरथसिंह,बाबूसिंह,सेठ अनोपसिंह,जयसिंह,सुमेरसिंह, ओमसिंह,अरविंदसिंह,राहुलसिंह, श्यामसिंह प्रमेश्वरसिंह,नारायणसिंह, श्रवणसिंह,प्रभूसिंह,अणदूसिंह, स्वरूपसिंह,सवाईसिंह,सोहनसिंह, महेंद्रसिंह,राजेन्द्रसिंह सहित सभी कार्यकर्ताओं ने भविष्य में भी ऐसे ही सामाजिक कार्य जारी रखने का संकल्प लिया।शुक्रवार शाम आयोजित सभा में श्रीब्रह्मजी मंदिर व अखिल भारतीय राजपुरोहित समाज विकास न्यास के अध्यक्ष संत तुलसारामजी महाराज व वेदान्ताचार्य डॉ ध्यानाराम महाराज ने प्रसादी वितरित कर आशीर्वाद दिया।ट्रस्ट महामंत्री बाबूलाल कालूड़ी ने शिक्षा, सेवा,समर्पण व संस्कार को जीवन का आधार बताते हुए मातृशक्ति की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि भैंसेर चावंडियाली की महिलाओं ने सेवा कार्यों में नई परंपरा की शुरुआत की है, जिससे अन्य गांवों को भी प्रेरणा मिलेगी उल्लेखनीय है कि भैंसेर चावंडियाली के कार्यकर्ता तीसरी बार आसोतरा धाम में सेवा व श्रमदान करने पहुँचे।