मृदुभाषी मिलनसार ललिता कंवर राजपुरोहित का निधन
जग में कुछ ऐसा काम कर जाओ दुनिया में तुम ना रहो फिर भी लोग तुम्हें याद कर अपने आंसू बहाए
एक आईना भारत/ भरतसिंह राजपुरोहित अगवरी
अगवरी / गुडाबालोतान निवासी 33 वर्षीय ललिता कंवर राजपुरोहित जिनकी शादी 13 वर्ष पूर्व हुई थी जब से ससुराल गुडा बालोतान आई अपनी मीठी मुस्कान और मधुर वाणी के कारण गांव की सभी महिलाओं प्रभावित कर लिया था हमेशा आदर भाव के साथ उनसे मिलना छोटे बड़े का संबंध करना हर किसी के सुख दुख में शरीक होना लेकिन शायद कुदरत को कोई और ही मंजूर था 2 दिन पूर्व अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण गांव से आहोर लाया गया और ज्यादा सीरियस स्थिति होने पर सुमेरपुर रेफर किया गया सुमेरपुर ले जाते वक्त ललिता राजपुरोहित ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया राजपुरोहित के निधन की खबर सुनकर आसपास की गांव की महिलाओं और ग्रामीणों में शोक की लहर छा गई है सभी लोगों ने अपने मुख से एक ही वाक्य निकाला कि ललिता राजपुरोहित एक संस्कारवान महिला थी जिनकी होड़ कोई और नहीं कर सकता महिलाएं कहती है ललिता बहुत संस्कारवान थी हमेशा सबके साथ हंस हंस के बातें करती थी अपने हाथों के हुनर के कारण विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां और सिलाई का कार्य करके बहुत सारी महिलाओं को भी उन्होंने रोजगार दिलवाने का प्रयास किया ललिता कंवर का कहना था काम कोई भी छोटा बड़ा नहीं होता हम अगर मेहनत लगन से करें तो उसमें भगवान हमें अवश्य सफलता दिलाता है जीवन में कभी भी कितने भी संकट आए कभी हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए राजपुरोहित के दो छोटे-छोटे बच्चे भी हैं जिन्हें दिल से बहुत प्यार करती थी आज उन बच्चों के सिर से मां का साया उठ जाने के कारण बच्चों का रो रो कर बुरा हाल है बच्चे रोते हुए एक ही सवाल पूछते हैं मेरी मम्मी कब आएगी मेरी मम्मी कब आएगी लेकिन उन बच्चों को कौन समझाए कि अब तुम्हारी मम्मी कभी नहीं आएगी
