जालोर आयोग सख्त: निर्माण न करने पर बिल्डर को रकम लौटाने के निर्देश उपभोक्ता को राहत: बिल्डर को 1.65 लाख वापस करने और हर्जाना देने का आदेश

  • जालोर आयोग सख्त: निर्माण न करने पर बिल्डर को रकम लौटाने के निर्देश
  • उपभोक्ता को राहत: बिल्डर को 1.65 लाख वापस करने और हर्जाना देने का आदेश


  • जालोर में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक अहम फैसले में बिल्डर को उपभोक्ता की जमा राशि लौटाने का आदेश दिया है। परिवादी मुस्तकीम पठान ने वर्ष 2015 में जोधपुर की अमर आदेश्वर इंफ्रास्ट्रक्चर इंद्रप्रस्थ कंपनी में 2 बीएचके फ्लैट के लिए 1.65 लाख रुपए जमा कर बुकिंग कराई थी, लेकिन तय समय पर न तो फ्लैट का कब्जा मिला और न ही निर्माण कार्य शुरू हुआ।

    इस मामले में परिवादी ने 19 अक्टूबर 2022 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत परिवाद दायर किया। नोटिस भेजने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष घनश्याम यादव और सदस्य निरंजन शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।

    आयोग ने अपने आदेश में बिल्डर को निर्देश दिया कि वह 1,65,000 रुपए की राशि 19 अक्टूबर 2022 से वसूली तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। इसके साथ ही मानसिक व आर्थिक नुकसान के लिए 10 हजार रुपए और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपए अतिरिक्त देने के भी निर्देश दिए गए।

    कंपनी ने यह तर्क दिया कि परिवादी ने स्वयं बुकिंग रद्द कराई थी, इसलिए 10 प्रतिशत राशि काटी जा सकती है। हालांकि आयोग ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि जब निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ, तो कंपनी को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। ऐसे में उपभोक्ता के अधिकारों का हनन करने वाली शर्तें लागू नहीं की जा सकतीं।

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